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मुझे नहीं चाहिए जंग ......

जो लोग कह रहा हैं कि इंडिया को पाकिस्तान पर युद्ध का एलान कर देना चाइए, उनको बस समझ की कमी है।

गुस्से में लिया गया फैसला अक्सर गलत होता है. अगर समाधान इतना आसान होता तो कब का इंडिया पाकिस्तान का समाधान हो गया होता।

समझना ये जरुरी है कि हमारा लक्ष्य क्या है। हमारा लक्ष्य है भारत की सुख समृद्धि।

हमारा लक्ष्य है कि भारत के जवानों को कभी शहीद ना होना पड़े. वो कैसे होगा, ये समझना महत्वपूर्ण है.

1. ज्यादा से ज्यादा टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल, ताकि कम से कम जवानों को दुर्गम स्थानों पर, विभस्त परिस्थिति में समय बिताना पड़े और फिर भी कोई भी पाकिस्तान से किसी और तरफ से हमारी सीमा में प्रवेश नहीं कर सके.

2. आतंकवाद , नक्सल इत्यादि का समाधान अगर इतना आसान होता, बस बात बन्दुक उठा के गोली चलने की होती तो ये सब समस्याएं कब की ख़तम हो जाती। करीब 4 दसक पहले पंजाब में ऐसी ही आतंकवादी गतिविधियां थी. ख़त्म हुआ। हाँ , गोलियां वहां भी चलानी पड़ी थी और यहाँ भी चलानी पड़ेगी, लेकिन बहुत सोच समझ के, बहुत ही प्लानिंग के साथ. बहुत ही सलेक्टिव तरीके से. जैसा पंजाब में किया, चुन चुन के, जो समाज की गन्दगी है उससे ख़तम करना है, समाज को ज़िंदा रखना है. युवाओं को जो भड़का रहे हैं, उनको पकड़ना है, उनकी ताकतों को ख़तम करना है. और जिसकी भी सरक़ार हो, कश्मीर के मामले में दीर्घ कालीन प्लान बना के बिना किसी पोलिटिकल इंटरफेरन्स के काम होना चाहिए। जैसे हमने पंजाब में किया, पूर्वोत्तर राज्यों में किया।

3. पंजाब , पूर्वोत्तर इत्यादि जगहों पर दीर्घ कालीन योजना के साथ काम हो पाया लेकिन वो कश्मीर को ले कर सरकार ज्यादातर नहीं कर पाती है उसका सबसे बबड़ा कारण है कि कश्मीर के आतंकवादी मुस्लमान हैं. और कुछ लोगों की रोजी रोटी राजनीती बस मुसलमानों को देशद्रोही साबित करने से ही चलती है. इसलिए वो किसी भी स्थिति में कश्मीर के मामे में ना कोई दीर्घकालीन निर्णय ले पाते हैं, ना कश्मीर के युवाओं को अपने साथ कर पाते हैं ना पाकिस्तान के मामले में कोई सही नीति बना पाते हैं.

4 . कश्मीर में लगभग 86 लाख मुस्लमान हैं, उसमें से लगभग 300 लोग हर साल आतंकवादी बनते हैं, लगभग 0.0035% . और उससे इतनी ज्यादा परेशानी है. इसलिए हमारा सारा ध्यान, ज्ञान और समय इसमें लगना चाहिए कि 1 भी कश्मीरी आतंकवादी न बने। एक भी कश्मीरी भारत से नफरत ना करे। एक भी कश्मीरी को ये न लगे कि हिंदुस्तान उनका देश नहीं है।

हमें हर हाल में नफरत को ख़तम करना पड़ेगा। ये कश्मीर वर्सेस भारत की लड़ाई नहीं है। ये लड़ाई कश्मीर के लिए है। इसमें हमें सबको साथ लेके चलना पडेगा। हम कश्मीर की लड़ाई कश्मीर के खिलाफ हो कर नहीं लड़ सकते। इस लड़ाई में हमें कश्मीर और कश्मीर वासियोंका तन मन से साथ जीतना होगा। जिस भी भी देखें उनको इतना मोह्हबत और इज़्ज़त दें कि वो कभी उनके मन में ये ख्याल भी नहीं आये की ये देश उनका नहीं है या कभी ये देश उनके खिलाफ हो सकते हैं या यह देश उनके हितों की रक्षा में कोई कसर छोड़ेगा।

5 . चूँकि जो कश्मीर के आतंकवादी हैं वो सब एक ही धर्म, मुस्लमान हैं, इसका मतलब ये नहीं है कि आप बाकि देश के 18 करोड़ मुसलमानों को किसी भी शक की निगाह से देखें। बस, सोचियेगा कि अगर 1 लाख में भी 1 मुस्लमान आतंकवादी बन जाये तो देश में लगभग 1800 आतंकवादी होंगे। बस सोचियेगा कि 300 आतंकवादी ने नाकों दम कर रखा है.

6. आतंकवादी हमला भयावह होता है, रूह कांप जाती है, मन करता है अभी हाथ में बन्दुक उठा लो और जंग कर लो, आर पार की लड़ाई करो, मुद्दा ही ख़तम करो, या तो ख़तम हो जाओ, या ख़त्म कर दो. लेकिन याद रखिएग़ा जंग उससे भी ज्यादा भयावह होती है. टीवी चैनल वालों के लिए सुनहरा मौका होता है, फ्री कंटेंट और TRP मिलती है। हथीयार बेचने वालों की चांदी हो जाती है. सत्ताधारी नेताओं को जनता का बेशर्त समर्थन मिलता है. लेकिन आम इंसान पिस जाता है. 40 CRPF जवानों के मौत से पूरा देश नहीं उबार पा रहा है, वहां लोग हज़ारों जाने जाती है। हज़ारों लाशें रोज, हामरे जवानों की. आँख से आंसू रुकते नहीं और लाशों का ताता लगा रहता है. किसके लिए? क्यों ?

7. लोग अक्सर ये सोचते नहीं लेकिन ध्यान रखिए , जंग होती है तो देश आर्थिक संकट में जाता है. हर देश. अंदर और बहार लड़ते लड़ते देश खोखला हो जाता है. लाखों नौकरियां जाती हैं. सरकारी नौकरियां जाती नहीं है लेकिन वहां भी सैलरी का संकट आ सकता है. क्या मैं नौकरी खोने की स्थिति में हूँ? सोचता हूँ, अगर देश की अर्थव्यवस्था ख़राब हो गयी, नौकरियां मिलनी बंद हो गयी, तो करेंगे क्या। खाऊंगा क्या ? अर्थव्यवस्था पहले से ही ख़राब है, नौकरी का मार्किट पहले से ही ख़राब है, अगर और ख़राब हो गया तो क्या करूँगा, कैसे जियूँगा?

जो भी हो , जंग ना हो, हमारे जवान सीमा के अंदर, सीमा पर या सीमा के बहार, कहीं भी शहीद न हों. इस देश का कोई बच्चा आतंकवादी न बने.

असतो मा सद गमय. तमसो मा ज्योतिर गमय..!!

(मैं सुमित कश्यप ,अक्सर कुछ भी लिखता हूँ तो उसके नीचे अपना नाम नहीं लिखता, लेकिन इस बार नाम लिख रहा हूँ ताकि इसमें लिखे हर शब्द की जिम्मेदारी मेरी हो, किसी और की नहीं; गूगल ट्रांसलेट पे कहा है, गलतियां काफी होंगी, पता है)

On Kashmir attack, Pakistan's Shah Mahmood Qureshi says 'violence is not the govt's policy'

Foreign Minister Shah Mahmood Qureshi has said «violence is not the policy of the government» while referring to an attack on Indian security forces in occupied Kashmir on Thursday, in which 44 Indian paramilitary soldiers were killed. 771 ord igjen

कुलभूषण जाधव मामले में आईसीजे फैसला मानेगा पाक

इस्लामाबादः कुलभूषण जाधव मामले में पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आइसीजे) का फैसला लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। पाकिस्तान के अधिकारी ने शुक्रवार को पाक का एक प्रतिनिधिमंडल मामले की मौखिक कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए हेग रवाना हो गया। आइसीजे में 18 फरवरी से कार्यवाही शुरू होगी।?

इंग्लिश क्वीन के वकील खवार कुरैशी 19 फरवरी को इस्लामाबाद का पक्ष रखेंगे और उसके बाद 20 फरवरी को भारत उसका जवाब देगा। 21 फरवरी को पाकिस्तान अंतिम दलील पेश करेगा। उम्मीद है कि आइसीजे का फैसला 2019 की गर्मियों में आ जाएगा।

आइसीजे ने हेग में 18 से 21 फरवरी तक खुली सुनवाई की तारीख तय की है। इस मामले में भारत की ओर से हरीश साल्वे सबसे पहले 18 फरवरी को दलील पेश करेंगे। वकील खवार कुरैशी 19 फरवरी को इस्लामाबाद का पक्ष रखेंगे और उसके बाद 20 फरवरी को भारत उसका जवाब देगा। 21 फरवरी को पाकिस्तान अंतिम दलील पेश करेगा। उम्मीद है कि आइसीजे का फैसला 2019 की गर्मियों में आ जाएगा।

विदेश

पाकिस्तान को यूरोपीय यूनियन ने दिया बड़ा झटका

नई दिल्लीः पाकिस्तान को अब यूरोपीय यूनियन ने बड़ा झटका देते हुए सऊदी अरब, पनामा और 4 अमेरिकी टेरिटरी को डर्टी-मनी ब्लैकलिस्ट नेशंस की सूची में डाल दिया है। ईयू एग्जीक्यूटिव का कहना है कि यह फैसला इसलिए किया गया है जिससे मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकियों की वित्तीय मदद को रोका जा सके। ईयू के इस फैसले पर कई देशों ने विरोध भी जताया है।

हालांकि यह लिस्ट अभी पास नहीं हुई है क्योंकि ईयू कमिश्नर ने इसे अभी प्रस्तावित किया है। यह मेजॉरिटी वोट से रद्द की भी की जा सकती है। इसके लिए उनके पास 2 महीने का समय है। यूएस ट्रेजरी ने इस लिस्ट के प्रक्रिया पर नाराजगी जताई है और इसे गलत बताया है।

यह है नियम
इस लिस्ट में शामिल देशों के लिए यह नियम हैं कि यूरोपीय देश इनके साथ बिजनेस नहीं कर सकते और इन पर सख्त कदम उठाते हैं। ईयू के कदम से पाकिस्तानी नागरिकों को व्यापार में काफी परेशानी होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तानी व्यापारियों को आसानी से लोन भी नहीं मिलेगा।

ये देश है शामिल
अब इस मामले पर ब्रिटेन को इस बात की चिंता है कि सूची में शामिल लोगों के साथ इकोनॉमिक रिश्तों का क्या होगा। वहीं पनामा ने कहा कि उसे इस सूची से बाहर किया जाना चाहिए क्योंकि उसने मनी लॉन्ड्रिंग के मसले पर गंभीर कदम उठाए हैं। ईयू की इस डर्टी लिस्ट में दक्षिण कोरिया, अफगानिस्तान, ईरान, इथियोपिया, पाकिस्तान, सीरिया, श्रीलंका, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, यमन और ट्यूनीशिया भी शुमार है। इसके अलावा बोत्सवाना, लीबिया, बहामास और घाना भी इसमें शामिल है।

विदेश

Navjot Singh Sidhu in Hot Water after commenting on Pulwama Attack

INDIA: The twitter brigade of the country has once again made it to the news after Navjot Singh Sidhu’s comments on Pulwama incident which happened on 14th of February in which 40 Indian Soldiers were killed. 427 ord igjen

India

Reasons to Date a Writer

You dread mornings. You dread the first touch of your toe on the marbled floor; a stinging reminder of a long day that beckons for your attention. 1 049 ord igjen

Lahore

Show don't tell

On the 14th of February, a group of terrorists (as far as I know) claiming to be from the JeM terrorist group lead a suicidal attack killing about 40 people (mostly CRPF soldiers). 185 ord igjen